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Friday, April 10, 2015

मैं और मेरे खटमल मित्र

मैं और मेरे खटमल मित्र,
हमेशा साथ मे रहते है|
जब मैं घर पर होता हू,
तो सुख दुख की बाते करते है||

मेरे खटमल मित्र,
मुझसे बहुत प्यार करते है।
और मेरे साथ मजे से,
मेरी खोली मे ही रहते है।।

जब घर पर मैं ना होऊ,
हो जाते है अकेले।
घंटों बैठकर दरवाजे पर,
मेरी ही राह तकते है।।

मेरे ना होने पर,
अगर बजती घंटी।
छुपकर किसी कोने मे,
डरे-डरे से तकते है ।।

मेरे वापस आते ही,
दौड़ के पास मे आते है।
पास बैठकर पूरी दिनचर्या को,
बड़े ही मन से सुनते है ।।

और रात का खाना,
मिलकर हम साथ मे खाते है।
एक ही बिस्तर पर सब सोते,
मेरा खून चुसते रहते है ।।

कभी-कभी ऊब जाने पर,
मेरे पैंट और शर्ट की जेब मे बैठकर।
मेरे ही साथ पुरा दिन,
मेरे साथ मे रहते है।।