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Thursday, December 4, 2014

नारी (एक बेबसी)

जब नारी ने जन्म लिया था !
अभिशाप ने उसको घेरा था !!

अभी ना थी वो समझदार !
लोगो ने समझा मनुषहार !!

उसकी मा थी लाचार ! 
लेकीन सब थे कटु वाचाल !! 

वह कली सी बढ्ने लगी ! 
सबको बोझ सी लगने लगी !! 

वह सबको समझ रही भगवान ! 
लेकीन सब थे हैवान !! 

वह बढना चाहती थी उन्नती के शिखर पर ! 
लेकीन सबने उसे गिराया जमी पर !! 

सबने कीया उसका ब्याह ! 
वह हो गयी काली स्याह !! 

ससुर ने मागा दहेज़ हजार ! 
न दे सके बेचकर घर-बार !! 

सास ने कीया अत्याचार ! 
वह मर गयी बिना खाये मार !! 

पती ने ना दीया उसे प्यार ! 
पर शिकायत बार-बार !! 

किसी ने ना दिखायी समझदारी ! 
यही है औरत कि बेबसी लाचारी !! 

ना मिली मन्जिल उसे बन गयी मुर्दा कन्काल ! 
सबने दिया अपमान उसे यही बन गया काल !! 

यही है नारी कि बेबसी यही है नारी की मन्जिल ! 
यही दुनिया कि रीत है यही मनुष्य का दिल !! 

मै दुआ करता हूँ खुदा से किसी को बेटी मत देना ! 
यदी बेटी देना तो इन्सान को हैवनीयत मत देना !
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